Friday, March 31, 2023

आखिर ऐसा क्यों?

"अरे छोटू तुम्हारी आंखों में ये आंसू कैसे?"

"दीदी एक बात बताओ मां हमेशा मुझे झूठा क्यों समझती हैं, पापा हमेशा मुझपर इतना शक क्यों करते हैं? क्या मैंने कभी किसी से झूठ बोला हैं, क्या मैं शक किए जाने लायक हूं? अच्छे लोगों के साथ कभी अच्छा क्यों नहीं होता? इससे तो अच्छे बुरे लोग हैं जो हमेशा अपने मतलब के लिए सबका इस्तेमाल करते हैं और खुश भी रहते हैं, हैना।"

"तुमसे ये किसने कहां? कि अच्छे लोगों के साथ हमेशा बुरा ही होता हैं मुझे तो ऐसा नहीं लगता,
और रही बात शक करने या झूठा समझने की तो क्या तुम उनके ऐसा समझने या शक करने से गलत हो सकते हो?
नहीं ना,"

"लेकिन दीदी सबसे ज्यादा पीड़ा तब होती हैं जब वे लोग हमें गलत समझे जो हमें सबसे ज्यादा जानते हैं, इतने सालों में भी वें मुझे समझ ही नहीं पाए और खुद को मेरा अपना कहते हैं, कभी कभी तो लगता हैं कि उन्हें अपने मन में झांकने को कह दूं, कि मेरी सोच-समझ भी देख लो, शायद मेरा मन पढ़कर उन्हें मुझपर यकीन आ जाए।"

"छोटू तुम क्यों सब को यकीन दिलाना चाहते हो, जो तुम्हारा अपना होगा उसे तुम्हे कभी सफाई नहीं देनी पड़ेगी, और कुछ जबरदस्ती के रिश्तों को सफाई देने की ज़रुरत बिल्कुल नहीं हैं क्योंकि उन्हें तुम पर विश्वास होता तो ये प्रश्न उठता ही नहीं। तो अब तुम मेरी एक बात हमेशा याद रखना कि हमें लोग उतना ही समझ सकते हैं जितनी बड़ी उनकी सोच हैं। वें हमें ठीक अपने जैसा समझते हैं। अगर वे अच्छे और सच्चे हैं तो उन्हें सिर्फ हमारी अच्छाई ही दिखाई देगी। वे हमें भी अपने जैसा सच्चा और नेक दिल समझेंगे लेकिन अगर वे झूठे और धोखेबाज हैं तो वें हमें अपने जैसा झूठा, कायर और धोखेबाज ही समझेंगे।
अब अपने आंसू पोंछ कर खुद को समझाओ कि ऐसे लोगों की बातों पर ध्यान देना बिल्कुल सही नहीं हैं।

"लेकिन दीदी वें जानते हैं न कि मुझे कोई जोर से चीख भी दे तो रोना आ जाता हैं।"

"हां, इसमें कोई बुराई नहीं हैं अगर तुम छोटी छोटी बातों पर रो देते हो, और वैसे भी लोगों का काम ही यहीं हैं वे अपनी कमियां हमेशा दूसरों में ढूंढते हैं और उसे शब्द देने की कोशिश करते रहते हैं, धीरे-धीरे एक न एक दिन उन्हें समझ आ ही जाएगा कि झूठे तुम नहीं हो, बल्कि उनकी सोच में झूठ जम गया हैं। उस दिन वें अपने उस जमें हुए झूठ और फरेब को अपने मन से कहीं दूर बहा देंगे,
लेकिन तब तक उनकी बातों पर ध्यान देकर अपने ये कीमती आंसू बहाने की कोई जरूरत नहीं हैं।"

"हां दीदी।"


16 comments:

  1. बिल्कुल सही समझाया।बढ़िया आलेख।बधाई।

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  2. Heart touching 💗

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  3. ,❤️❤️❤️👏👏

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  4. Well done sister

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  5. मार्मिक है यह काफी विद्यमान है हमारे समाज में जिसे दूर करना बहुत जरूरी है।
    लिखती रहो लड़की

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  6. Lovely writing Niharika.. Keep giving words to your thoughts..

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  7. बहुत बढ़िया ✨

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  8. ❤️👍👍👍

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  9. Krishna Gopal PrajapatiApril 2, 2023 at 7:52 PM

    👍

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  10. वाकई! अद्भुत...!

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  11. अत्यंत सुंदर,सरल,सटीक।

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