Thursday, May 7, 2026

एक खत, बेटी के नाम

हालांकि मेरी भी शिकायतें हैं तुमसे,

एक अरसा हुआ तुम घर नहीं लौटी,

जो गर तुम आ जाती तो मैं तुम्हें बताता,

कि मैं भी एक पिता होने से पहले एक इंसान हूं,

यह पहली ही जिंदगी है मेरी भी,

पहली शादी, पहली बेटी, पहली नौकरी, पहला परिवार ओर भी न जाने कितने पहले अनुभव.....

जिन में मैं भी प्रयोग कर रहा था, 

जीवनरूपी इस प्रयोगशाला में,

जब तुम गलतियां करती हो, 

तो मैं तुम्हें नन्ही गुड़िया समझकर माफ कर सकता था,

मगर मैं अनजान था इस बात से कि मेरे काम और जीवन का तनाव तुम पर फूट पड़ेगा,

तुम्हें डांटकर, मैं भी खुश तो नहीं था,

पर मैं कमजोर था, 

अपने अंदर के उस शोर को सुनने में,

जिसके लिए ठहरता तो शायद तुम्हारा स्कूल, बस्ता और जूते नहीं ला पाता,

अब तुम जो आ जाती तो मैं बताता, 

कि मैं भी कितना अल्हड़ और शरारती सा था,

जब तुम्हारी मां ब्याह कर आई थी, 

फिर समाज, घर, आटा, दाल में ऐसा उलझा कि खुद को भूल गया,

मेरे सपने, मेरी शिकायतें जैसे कहीं दूर हवा में उड़ गई,

जब तुम आंगन में आई,

फिर सिर्फ तुम, आटा, दाल, घर और तुम्हारा पालन पोषण, 

मेरा सपना हो गया,

हालांकि एक बार तो मैं भी भाग जाना चाहता था, 

जिम्मेदारियों के बोझ से दूर कहीं,

पर मैं रुका रहा,

परिवार बढ़ता गया और मैं घटता गया,

फिर भी शिकायतें नहीं थी मन में,

तुम्हें देखकर खुश हो लेता था, 

जब कमजोर पड़ता तो अकेले रो लेता था,

किससे कहता की कुछ दिन घर से छुट्टी चाहिए,

मैं कमजोर था, सो तुम से भी मदद नहीं मांगी,

कि मेरा सहारा बनो,

अब देखता हूं तो लगता है,

तुम पर विश्वास कर लेना चाहिए था,

जब तुम कहती थी पापा सब सम्हाल लूंगी,

मुझे तुम पर ये बोझ डाल देना चाहिए था,

पर मेरी नन्ही गुड़िया,

मैं कमजोर था,

सो तुम्हें बचा नहीं पाया, उन अनजान अनचाही छुअन की पीड़ा से, उस घुटन से,

जो आज तक तुम्हें सताती है,

डराती है मर्दों के साए से,

मैं भी मर्द हूं, 

और आज मैं उन सभी नामर्दों की ओर से तुमसे माफ़ी मांगता हूं।

जिसने तुम्हें कभी गलत नजर से देखा, 

घर लौट आओ अब प्यारी गुड़िया,

जो मैं फिर से चीखू, चिल्लाऊं, या फिर तुम पर हाथ उठाऊं,

तो मुझे रोक लेना इस बार,

चाहे हो जाए तकरार,

आखिर तुम भी कब तक सहोगी,


मैं चाहता तो दूर रख सकता था तुम्हें, 

उन कर्जदारों से जो दहलीज पर आकर चीखते थे,

उन रिश्तेदारों से जो हैवान से कम न थे,

उन सब लड़ाइयों से जो मैंने तुम्हारी मां से लड़ी,

पर मैं भी इंसान हूं,

मुझसे गलतियां हो गई हैं,

मैं ये तो नहीं कहता कि तुम मुझे माफ कर दो,

और लौट आओ,

क्योंकि ये इतना आसान नहीं,

पर मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं,

मेरी गुड़िया,

हो सकें तो मुझे माफ कर देना,

और हो सके तो लौट आना,

 जब भी तुम्हें ठीक लगे,

मैं तुम्हारा इंतजार करूंगा।


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