मैं आपकी बेटी, बहु, बहन, बीवी, ननंद, बूआ, मोसी, काकी, मामी, मां या सास होने के साथ साथ,
एक लड़की भी हूं,
एक औरत भी हूं,
और एक इंसान भी।
एक अस्तित्व मैं भी रखती हूं,
मेरे अपने भी कुछ सपने हैं,
जो मैने अपने बचपन में देखे थे,
इतना चौकने वाली क्या बात है?
क्या मेरा बचपन नहीं हो सकता,
क्या मैं इतनी जिम्मेदार और समझदार पैदा हुई थी,
क्या कभी मेरी आंखों ने बचपन वाले बचकाने से सपने नहीं देखे होंगे ?
मानती हूं वक्त और हालातों ने मुझे बहुत जिम्मेदार बना दिया हैं,
जैसे आपने मुझे देखा हैं,
लेकिन आप सब तो मेरे अपने हैं, न
तो फिर ये बात और कौन समझेगा?
कि मेरे भी कुछ सपने थे, जो अधूरे रह गए हैं,
मेरी ख्वाहिशें,
मेरी इच्छाएं, मेरी कल्पनाए, मेरे दोस्त, मेरी नीजी जिंदगी,
सब कुछ मेरे लिए कितना जरूरी हैं,
जैसे आपके लिए हैं, अपनी जिंदगी,
क्या इस बात का अंदाजा भी किसी को हैं?
आखिर क्यों और कब तक? मैं किसी और कि कहानी के नायक या नायिका की बहन, बेटी, बहु, पत्नी, मां या सास बनकर जीती रहूंगी,
क्या मैं अपनी कहानी की मूख्य किरदार नही हो सकती,
क्या मैं अपनी ही जिंदगी में,
अपने ही अपनो से,
अपनी ही कहानी को, अपने ही ढंग से लिखने का हक भी नहीं मांग सकती ........
ओर ये मांग रखने की हिम्मत करते करते,
न जाने कितनी नायिकाओं ने दम तोड़ दिया और वे रह गई किसी और की कहानी का सिर्फ एक किस्सा बनकर, मां, बहन, बेटी या बहु या पत्नी बनकर,
वें नहीं बन पाई अपनी कहानी की नायिका,
तुम भी उन से वहीं कहना जो मैंने कहा था,
सुनो,
तुम मत रह जाना, किसी और की कहानी का एक मामूली सा हिस्सा बनकर,
अपने परिवार से, इस समाज से, अपने बच्चों से और इस दुनिया से पूरी विनम्रता से अपना हक मांगना ,
ओर आगे बढ़ना, अपनी ही कहानी अपने ढंग से लिखने की खातिर,
डर कर रुक मत जाना,
पहला कदम मुश्किल होगा,
शायद बहुत मुश्किल,
उसके बाद ये सारी कायनात तुम्हारा साथ देने लगेगी,
मैं भी,
क्यूंकि मैंने चुन ली हैं,
इस डर से और अपने अपनों से लड़कर भी अपनी कहानी खुद लिखने की राह .......
मैने तो अपना नाम भी खुद चुन लिया हैं,
रैना💗
तुम कब चुन रही हो ????
कब खुद की कहानी फिर अपने ढंग से लिखना शुरू कर रही हो,
मैं तुम्हारे जबाव की प्रतीक्षा में हूं,
याद रखना ।
- तुम्हारी रैना🕊️
🔐❤️
ReplyDelete🔐❤️
ReplyDeleteGood
ReplyDeleteअच्छा लेख है ♥️
ReplyDelete