कितनी झूठी ज़िन्दगी जी रहे हैं न हम, हमारे पास न ठहरने का वक्त है, न ठहर कर सोचने का, एक शख़्स की किसी एक गलती पर हम उसकी शख़्सियत पर ही प्रश्नचिन्ह लगा देते हैं।
हम भूल जाते हैं कि वह सिर्फ़ एक गलती थी, या हमारी गलतफ़हमी। जो हम से भी कभी न कभी हो सकती है, लेकिन हम इतना क्यों सोचे? क्यों इतना वक्त बर्बाद करें? एक गलती मतलब वह इंसान भी गलत है।
उसकी बाकी अच्छाईयाँ कोई मायने नहीं रखती, उसकी बाकी आदतें, उसका व्यवहार, उसके एहसान कुछ भी मायने नहीं रखता!
हम भूल जाते हैं कि ये सिर्फ़ वक्त और किसी परिस्थिति का परिणाम है, ये सिर्फ़ एक गलती हैं, वह इंसान नहीं।
जिस इंसान को हम अपना मानते हैं, जिसके साथ हमने इतना वक्त बिताया हो, उसकी किसी छोटी सी भूल पर हम उससे इस तरह दूर हो जाते हैं, मानो हम उसे जानते ही नहीं। हम ने कभी उसका अच्छा स्वरूप देखा ही नहीं था।
इतनी जल्दी हम अपनी प्रतिक्रिया दे देते हैं न, मानो हमारी बातों से उस इंसान को कोई ठेस ही नहीं पहुँचेगी ।
बजाय उस इंसान के मन की स्थितियों को समझने की कोशिश किए, हम इतना कुछ बोल जाते है, जो शायद उस इंसान को पूरी तरह तोड़ कर रख सकता है।
हमारे किसी क़रीबी के कुछ शब्द हमारे मन पर ऐसे घाव कर सकते हैं जो शायद कभी न भर पाए। ये बात हम दूसरों की गलतियों पर कैसे भुल जाते है।
और किसी को गलत समझने से पहले हम कभी क्यों नहीं सोचते कि वह भी तो एक इंसान ही है। जब खुद ईश्वर ने गलतियाँ करने और उनसे सीख कर आगे बढ़ने के लिए ही दूसरा मौका देने का विकल्प रखा है ।
तो फिर हम कौन होते हैं, किसी के व्यक्तित्व पर प्रश्नचिन्ह लगाने वाले ???
एक गलतफहमी रिश्तो में दरार बना देती है....ये वाकई में एक गलतफहमी होती है न की कोई गुनाह यह सभी को समझना चाहिए
ReplyDelete💙👍
ReplyDeleteVery Good 👍
ReplyDeleteBohot sandar
ReplyDeleteBeautiful line
ReplyDelete101% सत्य 👌🏻👌🏻
ReplyDeleteप्रश्न चिन्ह नकरात्मक लगते हैं अक्सर पर उसका दूसरा पहलू सकारात्मक भी है जो हमें समय पर खड़े उतरने में मदत देता है।
ReplyDeleteबेहतर लिखी हो निहारिका 👍 बढ़ती रहो...
shukriya dosto
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