मृत्यु ?
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एक लम्बी चुप्पी के बाद उसने मुझसे पूछा
दीदी वो कौन हैं जिसने मेरे मां बाबा मुझसे छीन लिए...........?
विधाता ने या मृत्यु के दानव ने ?
ये एक बीमारी हैं या एक श्राप हैं,
कोई यमदूत हैं या,
कोई मौत का फरिश्ता, आखिर कौन है ये ??
बताइए ना ?
बड़ी ही मासूमियत से जब उसने ये सवाल पूछे, तो शायद मेरे पास कुछ नहीं था उस से कहने के लिए, जिसने अपना सारा संसार अपनी आंखो से उजड़ते देखा हो, वह भी इतनी छोटी सी उम्र में ।
हे विधाता!
मैंने हमेशा यही माना है कि आप जो भी करते है, अच्छा ही करते है, अच्छे के लिए ही करते है, लेकिन आज में उस बच्चे से ये सब नहीं कह सकी ....... लेकिन क्यों ?
इस बार आप जो कर रहे हैं वो हमे सही क्यों नहीं लग रहा है ?
क्या आपके मन में दया का लेश मात्र भी नहीं रहा गया है ?
पहले तो आप प्रेम और रिश्तों में जगत के प्राणियों को एक दूसरे के साथ जोड़ देते हो, उन्हे आपस में एक कर देते हो, मिला देते हो । प्रेम के बंधन में बांध देते हो लेकिन अभी तो उनकी आशाएं, अभिलाषाएं पूरी भी नहीं होती, वे अपने बनकर कुछ क्षण तृप्त भी नहीं होते कि आप उन्हें व्यर्थ ही अलग कर देते हो, बिल्कुल एक बच्चे के खेल की तरह सबकुछ व्यर्थ बना देते हो,
आख़िर क्यों ?
हे विधाता अगर आपने किसी मौत के फरिश्ते को भेजा है तो वो इतना क्रूर कैसे हो सकता है,
कि वो हमारे प्रिय जनो को हमारी आंखों से ओझल करके बहुत दूर ले जाना तो चाहता है, लेकिन क्या वह सच में इतना कठोर, इतना निष्ठुर, इतना हृदयहीन है? कि वह रुककर दो बात कहकर हमारा धीरज भी नहीं बांधता, आश्वासन भी नहीं देता हैं और बस आकर चोर की तरह ले जाता है हमारे अपनों को ???
जिनके बिना हम क्षण भर भी नहीं रह पाते थे, उन लोगों से हमें हमेशा के लिए दूर कर देता है। आज आपके इस दूत ने दुर्भाग्यवश मेरे सामने उस बच्चे का अपने माता-पिता से वियोग उपस्थित कर दिया है, जिसने अभी अभी मां पिता कहना सीखा था, इस बार आपने मुझे असमर्थ कर दिया है। इस बार मैं हमेशा की तरह नहीं कह सकी, "जो होता हैं अच्छे के लिए होता है।"
मैं खोज रही थी उत्तर इस बात का कि इस अपार विरहव्यथा में, मैं उससे क्या कहूंगी??
अतिसुंदर
ReplyDelete💙💐
ReplyDeleteकोमल वचन
ReplyDeleteबेहतर
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