Saturday, December 10, 2022

धर्म


 "अच्छा एक बात बताओं, ये धर्म क्या होता है?"

"आज तुम्हें क्या हुआ?  तुम तो खुद को नास्तिक कहती हो न।"

"हां कहती तो हूं लेकिन आज मुझे सिर्फ इतना बताओ कि ये धर्म क्या होता हैं?"

"अम्म्म, धर्म! मुझे इस की कोई सटीक परिभाषा तो नहीं आती लेकिन बाबा कहते थे कि एक ऐसा गुण जो मनुष्य का चिर सहचर हो, जिस गुण को कोई भी हमारी आत्मा से अलग नहीं कर सकता वही गुण हमारा धर्म होता हैं।"

"क्या मतलब,"

"मतलब जैसे सेवा करना हम सब के अंदर प्राकृतिक गुण है, हमारे विचार, संस्कार, दिनचर्या, खान-पान सब कुछ भिन्न होते हुए भी हम सभी किसी न किसी प्रकार से सेवा कार्य में लगे हुए है। सेवा चाहे हम अपने माता-पिता की करें या अपने गुरुओं की, अपने मित्रों की करें या अपने मालिक की, अपने स्वामी (बॉस) की करें या अपने जीवनसाथी की, प्राकृतिक जीवों की करें या प्रकृति की। हम सभी अपने अपने वातावरण और कर्मों की आवश्यकता के अनुकूल किसी न किसी की सेवा कर ही रहे हैं, तो केवल यही एक गुण है जो हमारा चिर सहचर है। सेवा करने के गुण को कोई भी नकार नहीं सकता चाहे कोई कितना भी बुरा व्यक्ति क्यों न हो, सभी के अंदर यह एक गुण होना ही मानवता की पहचान भी हैं।"

"लेकिन अगर कोई सेवा कार्य करता ही न है तो? उसका धर्म क्या होगा ? वैसे मेरा धर्म क्या होगा ?"

"क्या तुमने कभी किसी पौधे को पानी दिया हैं ? कभी किसी भूखे जानवर को कुछ खिलाया है ? किसी गिरते हुए व्यक्ति को उठाया हैं?  क्या कभी किसी थके व्यक्ति को एक गिलास पानी पिलाया हैं? कभी किसी हारे हुए व्यक्ति को सब ठीक हो जाएगा, यह कह कर सांत्वना दी हैं ?"

" हाँ, लेकिन ये मानवता हैं न, ये मेरा धर्म कैसे हुआ ? इंसानियत के नाते इतना तो हम सभी करते है।"

" केवल इतना ही ईमानदारी से करते रहना, यही हमारा धर्म हैं।"


"मेरे सभी प्रिय पाठकों को 74वे अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।  



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